भगवान Buddha की अस्थि मंजूषा को संरक्षित करने की योगी ने की मांग

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर भगवान Buddha से जुड़े पवित्र स्थल पिपरहवा (कपिलवस्तु) से खनन में प्राप्त अस्थि मंजूषा एवं अन्य अवशेषों को उनके मूल पवित्र स्थल पर एक स्तूपनुमा भवन बनवाकर संरक्षित करने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने इस कार्य के लिए जमीन की उपलब्धता होने की बात भी कही है।

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प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश भगवान Buddha से जुड़े पवित्र स्थलों के लिए जाना जाता है। महात्मा Buddha का अहिंसा, करूणा और मैत्री का संदेश संपूर्ण मानवता के लिए अमूल्य निधि है। भगवान Buddha के जीवनकाल से संबंधित महत्वपूर्ण 6 पवित्र स्थल उप्र में स्थित है। इन स्थलों में सिद्धार्थनगर जिले में स्थित कपिलवस्तु महात्मा Buddha का मूल स्थान होने के कारण बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है। कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य की राजधानी थी एवं महात्मा गौतम Buddha ने अपने प्रारंभिक जीवनकाल के 29 वर्ष कपिलवस्तु में व्यतीत किए थे।
जयवीर सिंह ने मुख्यमंत्री द्वारा लिखे गए पत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि 1898 में ब्रिटिश उपनिवेशिक काल में विलियम क्लैक्स्टन पेप्पे नामक सिविल इंजीनियर ने उप्र के बर्डपुर, वर्तमान पिपरहवा में एक स्तूप के उत्खनन के दौरान एक पत्थर के कलश में माणिक्य नीलम, पुखराज, मूंगा तथा स्फटिक रत्नों की महात्मा Buddha के अस्थि अवशेषों के साथ प्राप्त किया था। इनमें एक स्वर्ण पटिका पर पालि भाषा में भगवान Buddha के अस्थि अवशेष है। कालांतर में यह रत्न भण्डार क्लैक्स्टन पेप्पे के वंशजों को प्राप्त हुआ तथा 127 वर्ष बाद हांगकांग में सौधवी के नीलामी में दिखाई दी। जिसके बाद भारत सरकार द्वारा यह नीलामी रद्द कराकर जुलाई, 2025 में उसे भारत लाया गया है।
गौरतलब है कि पिपरहवा कपिलवस्तु की पावन भूमि जहां से भगवान बुद्ध के अवशेष प्राप्त हुए थे। कपिलवस्तु से लुम्बिनी (वर्तमान नेपाल में गौतम Buddha की जन्मस्थली) लगभग 26 किमी दूर है। जहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटको का आवागमन होता है। बौद्ध अवशेषों के प्रदर्शन से देश-विदेश से आने वाले बौद्ध पर्यटक आस्था एवं श्रद्धा के वशीभूत होकर यहां आने के लिए आकर्षित हो सकेंगे। जिससे पर्यटन सेक्टर का विकास होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

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