जयपुर डेस्क। Rajasthan में राजनीति को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। जानकारी मिल रही है कि Rajasthan सरकार पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव में दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों पर लगी पाबंदी को हटा सकती है। इसके लिए लगातार राज्य सरकार के पास अलग-अलग संगठनों नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मांग आ रही है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार ने भी अभी इस विषय पर गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया है। इस बात की पुष्टि स्वायत्त शासन एवम नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कर दी है।
तीसरी संतान की मिल सकती है छूट
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि सरकारी कर्मचारियों के लिए जब तीसरी संतान की छूट दी जा चुकी है तो जनप्रतिनिधियों के लिए भी इस तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। मंत्री किसी बहन के बाद माना जा रहा है कि बहुत जल्द भजनलाल सरकार में सभी पक्षों की राय लेते हुए इस बाध्यता को हटा दिया जाएगा। खर्रा ने बताया कि पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से संबंध में अनौपचारिक रिपोर्ट मंगवाई जा चुकी है और निश्चित तौर पर इसमें जल्द ही राहत दे दी जाएगी। इस संबंध में उन्होंने बात करते हुए कहा कि कर्मचारी और जनप्रतिनिधि दोनों ही सार्वजनिक सेवा में है ऐसे में उनके बीच अंतर किया जाना सही नहीं है।
भैरों सिंह शेखावत के समय बना था नियम
बता दे कि यह नियम 1994-95 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत की सरकार ने लागू किया था। Rajasthan पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत 2 से ज्यादा संतान वाले व्यक्ति पंचायत या निकाय का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इतना ही नहीं चुनाव जीतने के बाद यदि तीसरा बच्चा पैदा होने की स्थिति बनती है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने का भी प्रावधान है। इसके बाद 2002 में कर्मचारियों के लिए नियम में बदलाव किए गए थे जिसके तहत 2 से ज्यादा बच्चे होने पर भी सरकारी नौकरी नहीं मिलने का नियम बनाया गया था जो बाद में हटा दिया गया।
