Nishant Bhuwanika
जयपुर। Nobel Prize के लिए लंबे समय से मुंगेरी लाल के सपने देख रहे अमेरीकी के राष्ट्रपति ट्रंप को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है। भारत-पाक के बीच हुए सीजफायर का क्रेडिट लेने की कोशिश करने वाले ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित नहीं किया जाना अपने आप में ये संकेत देता है कि अमिरेका के अंदर हो रही तानाशाही के अंत की शुरूआत है। हालांकि ये कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन अमेरिका में जो कुछ भी बीते कुछ सालों में हुआ है वो इसी ओर इशारा करते हैं। हालांकि यहां खुश होने वाला कोई मोकेम्बो नहीं है लेकिन आधी दुनिया खुश जरूर है।
पाकिस्तान का भी टूटा दिल, अब कहां से भरेगा बिल…
अमोरिकी राष्ट्रपति लगातार दावे कर रहे थे कि उन्होंने भारक-पाक के साथ दुनिया में अलग-अलग 7 जंगें रूकवा चुके थे। इजरायल लंबे समय से युद्ध के समावेश में है और ये दावा कर रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने लोगों की जान बचाने के लिए काफी कुछ किया है। कुछ ऐसे ही बयान पाकिस्तान की ओर से भी आए थे। पाकिस्तान ने भी पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक के बीच हुए तनाव को कम करने के लिए ट्रंप को काफी अहम बताया था। शायद इसी कारण यूएन से पाक को भीख में अच्छी खासी रकम भी मिली थी। हालांकि उनपर इस रकम के लिए दबाव और बढ़ेगा।

व्हाइट हाउस से आया ये रिएक्शन
नोबेल समिति द्वारा डोनाल्ड ट्रंप को नजरअंदाज करने के बाद अब व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन का बयान भी सामने आ गया। स्टीफन ने कहा है कि नोबेल समिति ने यह साबित कर दिया है कि यहां राजनीति की गई है और शांति के प्रयासों से ज्यादा राजनीति को अहमियत दी गई। उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप शांति के लिए लगातार प्रयास करते रहे हैं और करते रहेंगे और आगे भी ऐसा ही करेंगे।
मारिया कोरिना मचाडो को मिला Nobel Prize
इस बार Nobel Prize के लिए जिम्मेवारी नॉर्वे की नोबेल समिति को दी गई थी। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ज्यादा इस संबंध में वेनेजुएला की विपक्ष नेता और मानव अधिकार कार्यकर्ता मारिया कोरिना मचाडो को उपयुक्त माना। बता दें की मारिया पिछले 20 सालों से वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और लोकतंत्र की पूर्ण स्थापना के लिए संघर्ष कर रही है। इस संबंध में नोबेल समिति में पीस प्राइज का ऐलान करते हुए यह भी कहा कि जब दुनिया में तानाशाही बढ़ रही है और लोकतंत्र धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है तो ऐसे में मारिया जैसे लोगों से दुनिया को हिम्मत मिलेगी।
