जयपुर डेस्क । बिहार इलेक्शन में चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन है। ऐसे में प्रदेश में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पक्ष विपक्ष के नेताओं का आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस बीच बिहार की छपरा सीट कुछ ज्यादा ही चर्चा में है। अब ये सीट चर्चा में हो भी क्यों ना, यहां का इलेक्शन अब Bhojpuri स्टार्स का पर्सनल अखाड़ा जो बन गया है। छपरा सीट से इस बार RJD नेता और Bhojpuri सुपरस्टार खेसारी लाल यादव मैदान में हैं। उनका मुकाबला बीजेपी की उम्मीदवार छोटी से है। जिसके समर्थन में Bhojpuri इंडस्ट्री के दो बड़े चेहरे पवन सिंह और दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ लगातार रैलियां और जनसभा कर रहे हैं। इन जनसभाओं में वे लगातार एक दूसरे की निजी जिंदगीयों पर भी सवाल उठा रहे हैं।
चुनाव के अंतिम दिन तेज हुआ बयानबाजियों का दौर
हाल ही में खेसारी लाल ने NDA की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा था कि, मंदिर बनाना जरुरी है, लेकिन अस्पताल, स्कूल और कॉलेज बनवाना भी उतना ही जरुरी है। अगर मंदिर बनने से बच्चों को शिक्षा और लोगों को रोजगार मिल जाता है, तो यहां 200 मंदिर बनवा दीजिए। फिर देखते हैं, कितने बच्चों का भविष्य निर्धारित हो पाता है।
खेसारी के इस बयान पर दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने उन्हें यदुमुल्लाह कह दिया, और कहा, “ऐसा आदमी यादव नहीं हो सकता”। पवन सिंह भी उनके पक्ष में उतर आए और कहने लगे, “ निरहुआ का बयान सही है, लोग मंच से क्या-क्या बोल रहे हैं, कि मैने चार-चार लोगों की जिंगदी बर्बाद की है, ऐसे तो उन्होंने ( खेसारी ) भी 400 लोगों की जिंदगियां बर्बाद की हैं।
चुनावी जंग में निजी जिंदगियों पर उठ रहे सवाल
आपको बता दें कि इससे पहले भी खेसारी लाल यादव ने पवन सिंह को लेकर बड़ा बयान दिया था और कहा था, कि वो मेरे बड़े भाई जैसे हैं, लेकिन मैं उनकी गलतियों पर पर्दा नहीं डाल सकता। उन्होंने कहा था कि मैं एक पानी पे नहीं रह सकता लेकिन में कम से कम एक बीबी के साथ तो रहता हूंं। खेसारी लाल का ये बयान ऐसे समय पर सामने आया जब उनका उनकी दूसरी पत्नी ज्योति सिंह के साथ घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है।
खेसारी के इस बयान पर पवन सिंह ने पलटवार भी किया, उन्होंने कहा कि “ मुझे सच्चाई पता है, क्या मुझे कहना चाहिए की उन्होंने उन्हें स्टार बनाने के लिए 500 जिंदगियां बर्बाद कर दी, मैं ऐसी बात नहीं कहना चाहता।
Bhojpuri स्टार्स की ऐसी बयानबाजियों को देखकर तो कहा जा सकता है, कि बिहार का विधानसभा इलेक्शन अब उनका पर्सनल अखाड़ा बन गया है, जहां वे एक दूसरे की निजी जिंदगियों पर कीचड़ उछाल रहे हैं।
