जयपुर डेस्क। बिहार चुनाव को लेकर अब सभी पार्टियां तैयार हो गई हैं, राजनीतिक पार्टियां अपना पूरा जोर लगा रही हैं। इसी क्रम में भाजपा अपने गठबंधन की पार्टियों के साथ मिलकर लगातार परिणामों को अपने पक्ष में करने के लिए काम कर रही है। NDA की सहयोगी पार्टियों में JDU और भाजपा के बीच 101-101 सीटों का बंटवारा हुआ था और बची हुई पार्टियों में 41 सीटों का बंटवारा तय हुआ था। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने उन 5 सीटों में भी अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं जहां पहले से चिराग पासवान के उम्मीदवारों के लिए सीटें आरक्षित हैं।
NDA में फूट का फायदा मिलेगा किसको
मौजूदा हाल को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि NDA में फूट पड़ी हुई है। हालांकि इस संबंध में अबतक कोई भी पार्टी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है। इस संबंध में चिराग पासवान ने कई बार अपनी स्थिति साफ की है कि वो किसी भी हाल में नीतीश कुमार के साथ हाथ मिलाने को तैय़ार नहीं है। खुद को पीएम मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग NDA का साथ छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं हैं। ऐसे में इस स्थिति का फायदा निश्चित तौर पर RJD औऱ कांग्रेस को मिलने वाला है।
LJP को मिली हैं कुल 29 सीटें
LJP को सीटों के बंटवारे के मामले में कुल 29 सीटें मिली हैं। जिनमें से 5 सीटों पर विवाद हो गया है। बिहार की राजनीति को करीब से जानने वाले लोगों की मानें तो तस्वीर साफ होने लगी है कि NDA में चीजें साफ नहीं है। ऐसे में निश्चित तौर पर बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है। इसके पीछे का कारण है कि चिराग और नीतीश कुमार में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं हैं।
