निशांत भुवानेका
जयपुर डेस्क। राजस्थान में इलाज के लिए सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जयपुर का SMS का हाल बुरा है। हालात ये हैं कि अगर अचानक से कोई हादसा हो जाता है तो सरकार के पास प्राइवेट अस्पतालों में जाने के सिवा दूसरा कोई उपाय नहीं बचता है। दीपावली का त्योहार भी करीब है ऐसे में लोगों को इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। फिलहाल हम अगर सिर्फ ट्रामा सेंटर की बात करें तो आगजनी हुए 10 दिनों से ज्य़ादा का समय बीत चुका है लेकिन स्थिति वापस पहले जैसे होने में अब भी काफी समय लगने वाला प्रतीत होता है।

क्या है ट्रॉमा सेंटर की स्थिति
SMS ट्रॉमा सेंटर में हुई आगजनी के बाद से स्थिति बहुत नाजुक बन गई है। स्थिति यह है कि ट्रामा सेंटर के पास कोई 46 ICU बेड की व्यवस्था है जिसमें से सिर्फ 22 बेड ही अभी चालू हैं। इसका साफ अर्थ है कि लोगों को दी जाने वाली राहत में बड़ा अंतर आया है। दूसरी ओर लगातार अस्पताल में मरीजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है लगभग 200 से 300 मरीज रोजाना SMS पहुंच रहे हैं जो की एक सामान्य आंकड़ा भी है। हालांकि यह और बात है कि अभी SMS का ट्रॉमा सेंटर इलाज करने की स्थिति में नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी अस्पताल प्रबंधन को हो रही है क्योंकि उन्हें मरीजों की प्राथमिकता को ध्यान में देते हुए बेड उपलब्ध कराना पड़ रहा है। मरीजों की वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है और उन्हें दूसरा अस्पतालों में रेफर भी किया जा रहा है।
मरम्मत का काम जारी, लेकिन काफी धीमा
अस्पताल में इलाज तो शुरू कर दिया गया है और यहां लगातार मरम्मत का काम भी जारी है लेकिन यह काम इतना धीमा है कि इसमें अब भी कम से कम 15 से 20 दिन का समय लगना लाजमी है। दूसरी और इलाज के सुचारू रूप से शुरू होने में एक और समस्या है क्योंकि अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकती है जिसके कारण ही अस्पताल का एक हिस्सा काम करने की स्थिति में नहीं है। वहीं मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या अस्पताल प्रबंधन के लिए परेशानी बनी हुई है।
क्या कहना है डॉक्टरों का
SMS ट्रामा सेंटर में काम करने वाले स्टाफ का कहना है कि मरीज का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके लिए कुछ ना कुछ करना जरूरी हो गया है। एक नर्सिंग स्टॉफ ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर CNX न्यूज़ को बताया कि फिलहाल मरीजों को बांगड़ परिसर में शिफ्ट किया जा रहा है लेकिन यह एक टेंपररी व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि यदि अचानक से राजधानी जयपुर में कोई हादसा हो जाता है तो फिर निश्चित तौर पर ट्रामा सेंटर अकेले स्थिति को संभालने में सक्षम नहीं हो सकेगा।
प्राइवेट अस्पतालों में जाने के लिए मजबूर
हालात कुछ इस तरह से खराब हो गए हैं कि मरीजों के परिजन प्राइवेट अस्पतालों में जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। एक परिवार के लोगों से CNX न्यूज़ के बात करने पर उन्होंने बताया कि उनके पास पैसे नहीं हैं लेकिन अगर उनके मरीज को प्राइवेट अस्पताल में नहीं ले कर जाया गया तो उनके मरीज की मौत हो सकती हैं। परिवार के कहना है कि इधर, आगजनी के बाद अस्पताल वाले साप कह रहे हैं कि मरीज के लिए फिलहाल ICU में बेड नहीं है। कुछ इसी तरह का हाल अन्य परिवारों का भी था जो जा सकते हैं वो अपने मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में लेकर जा रहे हैं लेकिन जिनके पास कोई दूसरा ऑपशन नहीं वो स्थिति के सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।
